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Mutual Fund Mistakes In Hindi: चाहते हो म्यूचुअल फंड में अच्छे रिटर्न पाना तो भूल कर भी ना करे यह गलतियां

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Table of Contents

Mutual Fund Mistakes In Hindi: ना जाने क्यों आज के समय में हमारे पास काफी सारे निवेश के विकल्प उपलब्ध होते हैं, फिर भी हम लोग परेशान रहते हैं कि आखिर अपने पैसे कहां निवेश करें। 

तो अगर आपके पास आपके पास खुदका कोई financial goal हैं जैसे घर खरीदना, गाड़ी खरीदना, कहीं विदेश घूमने जाना, बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे जमा करना, या अपनी रिटायरमेंट के लिए प्लानिंग करना आदि। 

तो म्युचुअल फंड में निवेश करना आपके लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।

क्यों ???

म्युचुअल फंड एक ऐसा निवेश का विकल्प है जो आपको FD से ज्यादा अच्छा रिटर्न देता है साथ ही इसमें आप अपने फाइनेंशियल गोल ( Financial goal ) के अनुसार भी निवेश कर सकते हो।

अगर आपको नहीं पता कि फाइनेंशियल गोल क्या है तो आसान शब्दों में कहे तो फाइनेंशियल गोल यानी आप पैसों से क्या क्या करना चाहते हो।

उधारण के लिए अगर आपका कोई शॉर्ट टर्म फाइनेंशियल गोल है जैसे अपने घर की मरम्मत कराना तो आपको एक Short Term Mutual Fund में निवेश करना चाहिए।

Mutual Fund Mistakes In Hindi

तो हो सकता है इन चीजों को पढ़ने के बाद आपके मन में ये ख्याल आए कि हां मुझे भी अपने पैसे म्युचुअल फंड में ही निवेश करने हैं। तो जरा रुकी है इस लेख में हमने आपको कुछ ऐसी गलतियां बताई है जो ज्यादा का निवेदक करते हैं।

Mutual Fund Mistakes In Hindi | Mutual Fund Errors
Mutual Fund Mistakes In Hindi

पहले इन गलतियों को अच्छे से समझ लीजिए उसके बाद ही फैसला लीजिए।

1. बिना Financial Goal बनाए म्युचुअल फंड में निवेश करना

ज्यादातर लोग म्युचुअल फंड में बिना किसी फाइनेंशियल गोल के निवेश करते हैं। यानी उन्हें पता ही नहीं होता है कि उन्हें कितना रिटर्न चाहिए और कब तक चाहिए। इस चक्कर में वह किसी भी म्युचुअल फंड स्कीम में पैसे लगा देते हैं और सही रिटर्न न मिलने पर म्युचुअल फंड को कोसते है।

उपाय : इस गलती से बचने के लिए आपको हमेशा अपना एक फाइनेंशियल गोल बनाना चाहिए जिससे आपको यह समझ आ जाएगा कि आपको कौन से म्युचुअल फंड निवेश करना है लॉन्ग टर्म ( Long Term ) या शॉर्ट टर्म ( Short Term )। 

2. मालूम ही नही की कितने पैसे खर्च करने है और कितने बचाने है 

किसी भी कामयाब निवेशक को देख ज्यादातर लोग म्युचुअल फंड में निवेश करने दौड़ पढ़ते हैं लेकिन उन्हें यह मालूम ही नहीं होता है कि वह अपने पूरे महीने में कितने पैसे खर्च करते हैं और कितने पैसे बचाते हैं। जिस वजह से वह सही फैसला नहीं ले पाते हैं कि उन्हें कितने पैसे निवेश करने चाहिए। 

उपाय : पूरे महीने में आप जितने भी पैसे कमाते उनका हिसाब रखें। यानी आप कितने पैसे खर्च करते हैं और कितने पैसे बचाते हैं। तभी आप उन बचाए हुए पैसों को सही से निवेश कर पाएंगे। नहीं तो आप समझ ही नहीं पाएंगे कि किस महीने कितना पैसा बचाना है और कितना निवेश करना है।

3. कभी भी इमरजेंसी फंड ( Emergency  Fund ) ना रखना 

मान लेते हैं कि आपने अपना फाइनेंशियल गोल चुन लिया साथ ही यह भी पता कर लिया कि आपको कितने पैसे बचाने हैं कितने निवेश करने हैं। लेकिन अगर आपने अपने लिए कोई इमरजेंसी फंड नहीं रखा तो ना जाने आप कितने ही अच्छी तरह से म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हो। 

आप को उन पैसों को अपनी मुसीबत के समय निकालना ही पड़ेगा, जिससे आपको काफी ज्यादा नुकसान हो सकता है। जहां आपके पैसे कंपाउंडिंग ( Compounding ) की मदद से काफी बढ़ सकते थे,  वहां आप को उन पैसों को निकाल कर अपनी इमरजेंसी में इस्तेमाल करना होगा।

उपाय : हमेशा अपने लिए एक इमरजेंसी फंड रखे। साथी अगर हो सके तो इंश्योरेंस ( Insurance ) भी करवाए जिससे अगर आप पर कोई मुसीबत आती है तो आपको अपने म्युचुअल फंड में निवेश हुए हुए पैसों को निकालना ना पड़े।

4. अपने रिस्क लेने की क्षमता को ना समझना

न्म्युचुअल फंड कई प्रकार के होते हैं जैसे Equity Funds जो इक्विटी यानी शेयर में निवेश करते है। Debt Funds जो बॉन्ड, डिबेंचर या अन्य सुरक्षित निवेश के विकल्प में निवेश करते है। और एक है Hybrid Funds जो इन दोनो में निवेश करते है। 

यानी इन तीनों ही म्युचुअल फंड के प्रकार में रिस्क की मात्रा अलग अलग होती है Equity funds में ज्यादा तो Debt funds में कम और Hybrid funds में रिस्क एक स्तर में होता है यानी medium होता है। न ज्यादा ना कम।

तो अगर आपको यह ही नहीं पता कि आप अपनी उम्र के अनुसार कितना रिस्क ले सकते हो तो आप उसे हिसाब का रिटर्न प्राप्त नहीं कर पाएंगे।

उधारन के लिए अगर आप एक 20 साल के लड़के हो तो आप Equity Funds में निवेश कर सकते हो क्योंकि आप इस उम्र में ज्यादा रिस्क ले सकते हो। वही एक ऐसा व्यक्ति है जिसकी उम्र 50 साल है तो वह आपकी तरह रिस्क नहीं ले सकता है। तो उसे या तो Debt Funds या Hybrid Funds में निवेश करना चाहिए। 

उपाय : अपनी उम्र को देखें साथ ही अपनी माली हालत को भी देखे। फिर तब कहीं जाकर कोई फैसला ले कि आप कितना रिस्क ले सकते हैं। जिससे आप सही समय में सही म्युचुअल फंड के प्रकार में निवेश कर पाएंगे जिससे आप अच्छा रिटर्न प्राप्त कर पाएंगे।

5. मार्केट के नीचे गिरने का इंतजार करते रहना

ज्यादातर लोग हमेशा इस इंतजार में रह जाते हैं कि अब मार्केट नीचे जाएगा तो सभी चीजों के भाव कम होंगे। तब वो निवेश करना शुरू करेंगे जिससे उन्हें ज्यादा रिटर्न मिलेगा। तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।

क्योंकि इस धरती पर कोई भी ऐसा पैदा नहीं हुआ है जो आपको यह बता सके की मार्केट इतना ही नीचे गिरेगा इससे ज्यादा नीचे नहीं गिरेगा। या यह बता दे की मार्केट इतना ऊपर होगा उससे ज्यादा नहीं।

उपाय : फालतू के इंतजार में ना रहे की मार्केट कब नीचे जाएगा और आप सस्ते में चीजों को खरीद पाएंगे। इसके बदले जब भी आपका निवेश करने का मन बन जाए आपको निवेश करना शुरू कर देना चाहिए। बाकी भविष्य में तो मौके आते ही रहेंगे। उसे समय खरीद लेना सस्ते में।

6. लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करना लेकिन शॉर्ट टर्म की परवाह करना

वैसे तो बहुत कम ही लोग ऐसे होते हैं जो लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करते हैं जो की बहुत अच्छी बात है। लेकिन उनमें से ज्यादातर लोग हमेशा शॉर्ट टर्म की परवाह करते रहते हैं कि अब मेरा म्युचुअल फंड बहुत घट गया है तो मुझे पैसे निकाल लेने चाहिए।

या अब मेरा म्युचुअल फंड बहुत ज्यादा बढ़ चुका है तो मैं ज्यादा प्रॉफिट लेकर निकाल लेता हूं। तो ऐसी सोच रखना बिल्कुल भी सही नहीं है। इससे आपको नुकसान हो सकता है।

उपाय : अगर आप म्युचुअल फंड में लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करो तो आपको निवेश करके भूल जाना है यानी आपको शॉर्ट टर्म में बिल्कुल नहीं देखना है कि आपका म्युचुअल फंड कैसा प्रदर्शन कर रहा है अच्छा या बुरा। क्योंकि लॉन्ग टर्म में ज्यादातर अच्छा रिटर्न ही मिलता है।

7. सिर्फ म्युचुअल फंड में ही निवेश करना

काफी सारे लोग ऐसे होते हैं जिन्हें शेयर मार्केट या किसी अन्य निवेश के विकल्प की कोई भी जानकारी नहीं होती है। तुम मजबूर होकर वह अपने पैसे सिर्फ म्युचुअल फंड में ही निवेश करते हैं। जो की सही नहीं है, इससे आपको नुकसान भी हो सकता है।

उपाय : माना कि म्यूचुअल फंड, निवेश करने का एक अच्छा विकल्प है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको अपने सारे पैसे सिर्फ म्युचुअल फंड में ही निवेश करने चाहिए। म्युचुअल फंड के साथ-साथ आप FD में भी पैसे निवेश कर सकते हो इमरजेंसी के लिए।

साथ ही खुद से शेयर मार्केट में निवेश कर सकते हो। या किसी अन्य निवेश के विकल्प में भी निवेश कर सकते हो। बोलने का मतलब यह है कि आपको अपने निवेश के अंदाज में Diversification रखना चाहिए। यानी सभी जगह में निवेश करना चाहिए सिर्फ एक जगह नहीं। इससे आपके नुकसान होने की संभावना काफी कम हो जाता है।

Mutual Fund Mistakes In Hindi – Conclusion 

देखिए गलती तो सब करते हैं लेकिन बहुत कम ही लोग ऐसे होते हैं जो अपनी उन गलतियों को सुधारते हैं। ठीक उसी तरह म्युचुअल फंड में भी निवेश के मामले में ज्यादातर लोग तो अपनी गलतियों पर ध्यान ही नहीं देते है फिर बाद में भारी नुकसान उठाते हैं।

लेकिन आपको ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना है। बल्कि अपनी गलतियों को जल्द से जल्द ठीक करना है। जिससे आपको अपने निवेश पर अच्छा रिटर्न मिले। 

साथ ही हम आशा करते हैं कि आपने इन गलतियों को अच्छे से समझा होगा और भविष्य में इन गलतियों से दूर रहेंगे। हमारा यही उद्देश्य है कि आप में से किसी को भी म्युचुअल फंड में निवेश करने में कोई नुकसान ना हो। और अगर हो भी जाए तो कोई ज्यादा बड़ा नुकसान ना हो।

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धन्यवाद !!!

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नमस्कार दोस्तों ! में इस लेख का लेखक हूँ, मुझे फाइनेंस और बिज़नेस टॉपिक्स पर लेख लिखना पसनद है |

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